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उत्तर प्रदेश

सरकार राजहठ छोड़ कर बिजली कर्मियों की मांगों पर गंभीरता दिखाए।



अमित कुमार त्रिवेदी

कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश ।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की बैठक अपर श्रमायुक्त कार्यालय परिसर में स्थित एसोसिएशन आफिस में संयुक्त मंच के संयोजक असित कुमार सिंह ने बताया कि निजीकरण के विरोध और विभागीय कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रांतीय पदाधिकारियों की कुछ माह पूर्व ऊर्जामंत्री व अफसरों के साथ वार्ता हुई थी। इसमें कुछ बिंदुओं पर समझौता होने पर ऊर्जामंत्री ने उनको लागू करने का आश्वासन दिया था। उस समझौते को प्रदेश सरकार लागू नहीं कर रही है। इसको लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार के खिलाफ आंदोलन हुआ है।
इंटक, एटक, एच एम एस, सीटू, ऐक्टू,, ए आई यू टी यू सी तथा टी यू सी सी के श्रमिक नेताओं ने कहा कि 3 दिसंबर 2022 को प्रदेश सरकार और बिजलीकर्मियों के बीच समझौता हुआ था। सरकार की तरफ से ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने समझौते के बिंदुओं को लागू करने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। अब तीन महीने से अधिक समय गुजर चुका है। मगर समझौते पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि सरकार ने समझौते में कहा था कि बिजली कंपनियों के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का चयन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित एक समिति के जरिए ही किया जाएगा। लेकिन, इस व्यवस्था को बंद करके अब इन पदों पर स्थानांतरण के आधार पर तैनाती की जा रही है। जिससे टकराव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। सरकार को राजहठ छोड़ कर कर्मचारियों के साथ सकारात्मक कदम उठाए। सरकार ने कर्मचारियों के खिलाफ कोई दमनात्मक कदम उठाया तो जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा।
बैठक में कॉमरेड राणा प्रताप सिंह, राजीव खरे,धर्मदेव, एस ए एम ज़ैदी, कुलदीप सक्सेना, कमल चतुर्वेदी,विजय कुमार शुक्ला, आशीष कुमार सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए।

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