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हर मर्द औरत बुढ़े बच्चे जवान पर सदकाए-फित्र वाजिब है-मुन्ना अंसारी

अहमद रजा की रिपोर्ट

महराजगंज ।जनपद महराजगंज के निचलौल तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रमजान शरीफ़ के आखिरी जुमा यानी अलविदा की नमाज़ के पहले मुन्ना अंसारी ने हदीस ए पाक की रौशनी में और हदीस की किताबों को पढ़ने के बाद तमामी मुस्लिम हजरात के सामने पेश की उन्होंने कहा कि “ह़ुज़ूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक शख़्स को भेजा के मक्का के कूचों में ऐ़लान कर दे के सदक़ा-ए-फ़ित्र वाजिब है

यह शब्द (तिरमिज़ी शरीफ़, जिल्द 2, सफ़ह 151, ह़दीस़ 674) में लिखा है। हदीस की किताबों में यह भी लिखा है कि

सदक़ा-ए-फ़ित्र हर मुसलमान मालिक-ए-निसाब पर वाजिब है । निसाब वो जो ह़ाजत-ए-असलिया से फ़ारिग़ हो (ह़ाजत-ए-असलिया यानी वो चीज़ जो ज़िंदगी गुज़ारने में ज़रूरी है जैसे घर, कपड़े, गाड़ी, मोबाइल वगै़रह)

नाबालिग़ या मजनूं (पागल) मालिक-ए-निसाब हो तो उन पर भी सदक़ा वाजिब है ।

सदक़ा-ए-फ़ित्र के लिए अ़दा का वक़्त उ़म्र भर तक है (तो अब तक पिछले सालों का) अगर अ़दा न किया हो तो अब अ़दा करे, (के) अ़दा न करने से साक़ित न होगा (यानी माफ़ न होगा) न अब अ़दा करना क़ज़ा है (यानी अगर पीछे सालों का अब तक नहीं दिया और अब देना चाहता है तो उसका अभी देना भी अ़दा है, क़ज़ा नहीं), हां मसनून ये है के ई़द की नमाज़ से पहले अ़दा करे ।

(बहार-ए-शरीअ़त, जिल्द 1, ह़िस्सा 5)
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उक्त बातें रमजान शरीफ के आखिरी जुमे यानी अलविदा के दौरान तमाम मुस्लिम समुदाय के लोगों से कही इस दौरान शितलापुर खेसरहा के तमामी मुसलमान उपस्थित रहे।

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