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महाराजगंज

अकीदत के साथ मनाया गया ईद उल अजहा

 

ग्रामसभा रुद्रापुर के ईदगाह में अदा की गई इदुल जोहा की नमाज़।

 

ईदगाह में अदा की गई ईदुल अज़हा की नमाज़ गले लगकर दी बकर ईद की मुबारकबाद

 

सिसवा ब्लॉक के अंतर्गत ग्रामसभा रुद्रापुर में अक़ीदत के साथ ईदुल अज़हा की नमाज़ अदा की गई। ग्रामसभा रुद्रापुर के ईदगाह में नमाज़ पढ़ने का 7 बजे टाइम रखा गया था। ग्रामसभा रुद्रापुर के सारे मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा जमा होकर बिल्कुल टाइम से अक़ीदत व मोहब्बत के साथ ईदुल अज़हा की नमाज़ को अदा की गई।

 

आज ग्रामसभा रुद्रापुर में अकीदत व मोहब्बत और एहतराम के साथ मनाया गया। इस दौरान ईदगाह में नमाज अदा करने पहुंचे लोगों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। और लोग भारी तादाद में जमा हुए।

इस अवसर पर रुद्रापुर के स्थित पुरानी ईदगाह में मुस्लिम समुदाय के लोगों को ईद उल अजहा की नमाज अदा करवाई। लोगों ने सामूहिक रूप से *ख़ुदा* के बारगाह में सजदा किया। और नमाज़ के बाद मुल्क में अमन चैन, भाईचारा और खुशहाली की दुआएं मांगी और एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारक बाद दी।

ईद के मौके पर हाफ़िज़ व हाजी मोहम्मद इब्राहिम ने

बताया कि हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. जानते हैं कि बकरीद पर आखिर क्यों दी जाती है कुर्बानी.

 

ईद उल अजहा और बकरीद ईद उल अजहा और बकरीद

 

आज देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ बकरीद का त्योहार मनाया गया है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, बकरीद हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. बकरीद को ईद उल अजहा, ईद उल जुहा, बकरा ईद अथवा ईद उल बकरा के नाम से भी जाना जाता है. बकरीद के मौके पर मुस्लिम धर्म में नमाज पढ़ने के साथ साथ जानवरों की कुर्बानी भी दी जाती है. इस्लाम के अनुसार, मुस्लिम धर्म के लोग *अल्लाह* की रजा के लिए कुर्बानी करते हैं। त्याग व बलिदान की लोगों की जानकारी देते हुए। लोगो को इस त्यौहार की महत्ता समझाकर बुराइयों के परित्याग करने तथा गरीब व दीन दुखियो की भलाई के लिए त्याग और कुर्बानी का आह्वान किया।

आपको बता दें कि इस्लाम धर्म के पांच मुख्य अरकान में से एक हज के मुकम्मल होने पर ईदुल अजहा मनाया जाता है। ईदुल अजहा को कुर्बानी का त्यौहार भी कहा जाता है।

नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारक बाद दी।

ईदुल अजहा पर जानवर की कुर्बानी तो सिर्फ एक प्रतीक भर है। दरअसल इस्लाम धर्म जिंदगी के हर क्षेत्र में कुर्बानी मांगता है। इस्लाम में क़ुरबानी का बहुत अधिक महत्व है।

*अल्लाह* की राह में अपना सर्वस्त्र न्यौछावर कर *अल्लाह* की राह में क़ुरबानी का मतलब नेक और भलाई के कामों में खर्च करना है। यह पर्व आस्था, त्याग, और बलिदान का पर्व है, जो इंसान को त्याग और बलिदान की भावना सिखाता है। कुर्बानी का असली मकसद अपनी सबसे प्यारी चीज को ख़ुदा की राह में कुर्बान करना है, फिर वो चाहे धन-दौलत हो, सम्पति हो या जानवर की कुर्बानी।

इस मौके पर गांव के तमाम मुस्लिम समुदाय के मौजूद थे।

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